अन्न्मय-कोष का प्रवेश द्वार – नाभि चक्र

गर्भाशय में भ्रूण का पोषण माता के शरीर की सामग्री से होता है। आरंभ में भ्रूण, मात्र एक बुलबुले की

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व्याहृतियों में विराट का दर्शन

भूर्भुवः स्वस्त्रयो लोका व्याप्तमोम्ब्रह्म तेषुहि स एव तथ्यतो ज्ञानी यस्तद्वेत्ति विचक्षणः॥ -गायत्री स्मृति शास्त्रों का कथन है कि “भू, भुवः

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षोडश कलाओं का विवेचन ( 16 कला )

वाचस्पत्यम् में “कला” शब्द की वयुत्पत्ति इन शब्दों में विवेचित है – कलयति कलते वा कर्तरि अच्, कल्यते ज्ञायते कर्मणि

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