Gayatri Mantra And Fibonacci

“Gayatri Mantra has a rhythm or meter of 24!” 

Gayatri Mantra does therefore relate directly to the Mathematics of Nature; since the compressed Fibonacci Sequence has an infinite recurring rhythm of 24 digits and that these 24 digits have a distinct sum or numerological vibration of 108.

And that these 24 compressed digits having a sum of 108 is an infinitely recurring sequence, proving that there is a pattern in the Golden Mean, a revolution in mathematics as all the top scholars and history books deny it.

The compression or patterned reduction of the Fibonacci Sequence being a 24 Code since 1984, and needed to know that other rishis or seers had recorded this in their Vedic Scriptures, but it was not in print anywhere to be found.

It gave importance to some of the questions like :

1) Why is the world deliberating misinformed about Sacred Geometry and Number Theory.

2) What is its true Power that ‘Those Families Who Secretly Rule The World’ dont want us serfs to know about, in fear that it may awaken our Consciousness, when we recognise that yes, there is Mathematical Order amidst the Chaos.

“This confirmation for Jain is quite significant as it is the first time that someone has actually explained why 108 is important. People for thousands of years have blindly believed it is significant, but knowing really knowing why. This particular discovery by Jain has humbly put him on the world stage, as people who do his seminars are fully convinced that this is high level and galactic mathematics, despite the natural debunking process that inevitable goes on, Jain is convinced that this ability to teach mathematics via Pattern Recognition will set a new trend in the planet’s future mathematical curriculum.

This discourse on the Gayatri mantra resonating to 24 is an ancient truth.
24 is the Time Code.
Why did our forbears select 24 hours to the Day, why not say 27 hours to the day. (Bruce Cathie, Grid scientist and pioneer, does use 27 hours to the day to verify that no atomic bombing can happen unless the harmonics are in accordance with the day and grid resonating to 27 divisions, which is interesting, as Pythagoras adored this Harmonic Vibration of 27).

24 arithmetic numbers in concentric rings that reveal the 4th Dimensional Cross of the Prime Numbers, that 24 Cracks the Code, via the powerful tool of Symmetry.
(What this means is that the Prime Numbers that you know of, do exist in symmetry, but you have been told mathematical distortions, for thousands of years, that it is a nonsense sequence with no pattern. Why? Because it is a StarGate. 24 is a Time Code. We wear it on our watches and have no real understanding of what is looking us daily in the face.

Chandan Priyadarshi

Chandan Priyadarshi

A student of Spirituality from the ancient city of Nalanda, a Vedantic by faith, an independent philosopher and wanna be philanthropreneur by interest just trying to explore the subtle world of Ancient Philosophy with reference to Modern Science. Having an immense ineterest in Ancient Indian and Vedic Philosophy, Philology, Lexicography, Comparative Religion, Comparative Philosophy, Oriental and Occidental Philosophy, Astrophysics and Astronomy, Ancient and Modern History, Parapsychology, just want to project an integral and synthesized approach of Ancient Philosophy and Modern science to world.

2 thoughts on “Gayatri Mantra And Fibonacci

  • October 30, 2011 at 9:17 AM

    it is very nice yaar. Kuchh baat samajh me nahi aayi hai jo tumse milne per samjhunga.

  • September 5, 2012 at 1:33 PM

    कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के जनक (father of computer programing )

    महर्षि पाणिनि के बारे में जाने

    पाणिनि (५०० ई पू) संस्कृत भाषा के सबसे बड़े वैयाकरण हुए हैं। इनका जन्म तत्कालीन उत्तर पश्चिम भारत के गांधार में हुआ था। इनके व्याकरण का नाम अष्टाध्यायी है जिसमें आठ अध्याय और लगभग चार सहस्र सूत्र हैं। संस्कृत भाषा को व्याकरण सम्मत रूप देने में पाणिनि का योगदान अतुलनीय माना जाता है। अष्टाध्यायी मात्र व्य
    ाकरण ग्रंथ नहीं है। इसमें प्रकारांतर से तत्कालीन भारतीय समाज का पूरा चित्र मिलता है। इनका जीवनकाल 520 – 460 ईसा पूर्व माना जाता है ।
    एक शताब्दी से भी पहले प्रिसद्ध जर्मन भारतिवद मैक्स मूलर (१८२३-१९००) ने अपने साइंस आफ थाट में कहा –

    “मैं निर्भीकतापूर्वक कह सकता हूँ कि अंग्रेज़ी या लैटिन या ग्रीक में ऐसी संकल्पनाएँ नगण्य हैं जिन्हें संस्कृत धातुओं से व्युत्पन्न शब्दों से अभिव्यक्त न किया जा सके । इसके विपरीत मेरा विश्वास है कि 2,50,000 शब्द सम्मिलित माने जाने वाले अंग्रेज़ी शब्दकोश की सम्पूर्ण सम्पदा के स्पष्टीकरण हेतु वांछित धातुओं की संख्या, उचित सीमाओं में न्यूनीकृत पाणिनीय धातुओं से भी कम है । …. अंग्रेज़ी में ऐसा कोई वाक्य नहीं जिसके प्रत्येक शब्द का 800 धातुओं से एवं प्रत्येक विचार का पाणिनि द्वारा प्रदत्त सामग्री के सावधानीपूर्वक वेश्लेषण के बाद अविशष्ट 121 मौलिक संकल्पनाओं से सम्बन्ध निकाला न जा सके ।”

    The M L B D News letter ( A monthly of indological
    bibliography) in April 1993, में महर्षि पाणिनि को first softwear man without hardwear घोषित किया है। जिसका मुख्य शीर्षक था ” Sanskrit software for future hardware ”
    जिसमे बताया गया ” प्राकृतिक भाषाओं को कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के लिए अनुकूल बनाने के तीन दशक की कोशिश करने के बाद, वैज्ञानिकों को एहसास हुआ कि कंप्यूटर प्रोग्रामिंग में भी हम 2600 साल पहले ही पराजित हो चुके है। हालाँकि उस समय इस तथ्य किस प्रकार और कहाँ उपयोग करते थे यह तो नहीं कह सकते, परआज भी दुनिया भर में कंप्यूटर वैज्ञानिक मानते है कि आधुनिक समय में संस्कृत व्याकरण सभी कंप्यूटर की समस्याओं को हल करने में सक्षम है।

    व्याकरण के इस महनीय ग्रन्थ मे पाणिनि ने विभक्ति-प्रधान संस्कृत भाषा के 4000 सूत्र बहुत ही वैज्ञानिक और तर्कसिद्ध ढंग से संगृहीत हैं।

    NASA के वैज्ञानिक Mr.Rick Briggs.ने अमेरिका में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और पाणिनी व्याकरण के बीच की शृंखला खोज की। प्राकृतिक भाषाओं को कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के लिए अनुकूल बनाना बहुत मुस्किल कार्य था जब तक कि Mr.Rick Briggs. द्वारा संस्कृत के उपयोग की खोज न गयी।
    उसके बाद एक प्रोजेक्ट पर कई देशों के साथ करोड़ों डॉलर खर्च किये गये।

    महर्षि पाणिनि शिव जी बड़े भक्त थे और उनकी कृपा से उन्हें महेश्वर सूत्र से ज्ञात हुआ जब शिव जी संध्या तांडव के समय उनके डमरू से निकली हुई ध्वनि से उन्होंने संस्कृत में वर्तिका नियम की रचना की थी।

    पाणिनीय व्याकरण की महत्ता पर विद्वानों के विचार

    “पाणिनीय व्याकरण मानवीय मष्तिष्क की सबसे बड़ी रचनाओं में से एक है” (लेनिन ग्राड के प्रोफेसर टी. शेरवात्सकी)।
    “पाणिनीय व्याकरण की शैली अतिशय-प्रतिभापूर्ण है और इसके नियम अत्यन्त सतर्कता से बनाये गये हैं” (कोल ब्रुक)।
    “संसार के व्याकरणों में पाणिनीय व्याकरण सर्वशिरोमणि है… यह मानवीय मष्तिष्क का अत्यन्त महत्त्वपूर्ण अविष्कार है” (सर डब्ल्यू. डब्ल्यू. हण्डर)।
    “पाणिनीय व्याकरण उस मानव-मष्तिष्क की प्रतिभा का आश्चर्यतम नमूना है जिसे किसी दूसरे देश ने आज तक सामने नहीं रखा”। (प्रो. मोनियर विलियम्स)

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